सेलेनियम औषधि का होम्योपैथी में प्रयोग Selenium Uses in Hindi

नमस्कार दोस्तों आ सभी के बीच होम्योपैथी चिकित्सा की एक गुणकारी औषधि को लेकर आये है जिस औषधि का नाम है सेलेनियम जो कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में लिए एक उपयोगी औषधि है।

सेलेनियम (Selenium) औषधि-

जवानी के जोश अपना होश खोकर अपने जीवन को संकट में डाल लेते है ऐसे लोगों में  सेलेनियम औषधि बहुत ही उपयोगी मानी जाती है सेलेनियम के रोगी जवानी के जोश में आकर अपने वीर्य को समय से पहले ही समाप्त कर चुके होते हैं वीर्य व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है जिसका संबंध किसी व्यक्ति की जीवनी शक्ति है लेकिन जब कोई व्यक्ति नियम विरुद्ध संयम खोकर इसे अनायास ही बाहर कर देता है तो इसका उस व्यक्ति पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है ऐसे रोगी संभोगक्रिया के समय पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। ऐसे में यह रोगों सेलेनियम का रोगी हो जाता है जिसे सेलेनियम लेने की आवश्यकता होने लगती है। 
इसके अलावा शारीरिक और दिमागी थकान, बुढ़ापे में, टी.बी रोग के बाद कमजोरी आने में भी ये औषधि लाभकारी मानी जाती है।

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  Homeopathic Medicine Selenium

किन किन लक्षणों में सेलेनियम औषधि उपयोगी है।

विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर सेलेनियम औषधि से होने वाले लाभ-

सिर से सम्बंधित लक्षण- 

सेलेनियम के रोगी को ऐसे चक्कर से आते है जैसे एक नशेड़ी व्यक्ति की नशे की हालत में हरकते होती है। पुराने शराब पीने वाले व्यक्तियों के सिर में दर्द होता है रोगी के सर में कंघी करने के दौरान उसके सिर के बाल झड़ने लगते हैं, इसी के साथ ही दाढ़ी मूछों के बाल और जननेन्द्रिय के ऊपर के बाल भी झड़ने लगते हैं। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि का सेवन कराना लाभदायक रहता है।

कान से सम्बंधित लक्षण- 

सेलेनियम के रोगी को कानों से ठीक से सुनाई नहीं देता है इसका कारण यह होता है कि कानों में मैल जम जाता है जिसके कारण वह सेलेनियम का रोगी बन जाता है और सेलेनियम के प्रयोग से उसे लाभ मिलता है।

पेट से सम्बंधित लक्षण- 

सेलेनियम के रोगी में कब्ज बनी रहती है मल पूरी तरह से बाहर नही निकल पाता आंतों में मल जमा होता रहता है जिसके कारण मल सख्त हो जाता है।
जिगर के रोग होने के कारण जिगर में दर्द होना और इसी के साथ ही जिगर पर छोटे-छोटे से दाने निकलना, 
इन लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देना बहुत ही लाभकारी रहता है।

नाक से सम्बंधित लक्षण- 

रोगी की नाक के अंदर इतनी तेज खुजली होती है कि रोगी को न चाहते हुए भी बार-बार अपनी उंगली को नाक में डालना पड़ता है, 
रोगी को जुकाम होने के बाद बहुत पतले दस्त आते हैं। 
इस तरह के लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि का सेवन कराना काफी लाभदायक साबित होता है।

गले से सम्बंधित लक्षण- 

रोगी को टी.बी के रोग हो जाने के कारण पैदा हुई आवाज की नली की शुरुआती जलन, 
रोगी के रोजाना सुबह खंखारने पर पारदर्शी बलगम के ढेले निकलते रहते हैं, 
रोगी के गले में खराश सी होना, 
सुबह के समय खांसी के साथ खून वाला बलगम आना, 
गाना गाने वाले लोगों की गले की खराबी 
जैसे लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देना बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

मल से सम्बंधित लक्षण- 
सेलेनियम के रोगी का माल अताओं से पूरी तरह से बाहर न निकल पाने के कारण आनदर ही जमा होकर सख्त हो जाता है जिस कारण से माल त्याग करनेमे तकलीफ होती है ज्यादा जोर लगाने पर मल द्वार से खून भी आ सकता है।
कई बार माल द्वार में उंगली डालकर भी मल निकलना पड़ता है।
रोगी को टाइफाइड का बुखार होने के बाद अक्सर इस तरह की परेशानी पैदा हो जाती है। इस प्रकार के लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि का एवं कराना लाभप्रद होता है।

आमाशय से सम्बंधित लक्षण- 
सेलेनियम के रोगियों में रात के समय भूख की अधिक लगती है।
अगर रोगी शराब का सेवन पहले से करता रहा है तो जब वो सेलेनियम का रोगी हो जाता है तो ऐसी स्थिति में रोगी को हमेशा शराब पीने की तीव्र इच्छा होती है।
शक्कर, नमकीन खाना, चाय और कोल्ड ड्रिंक पीने से आमाशय का रोग बढ़ जाता है आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को सेलेनियम औषधि का सेवन कराना लाभकारी रहता है।

मूत्र (पेशाब) से सम्बंधित लक्षण- 
सेलेनियम का रोगी पेशाब के लिए जाता है तो पेशाब करने के शुरुआत में ही एक या दो बूंद वीर्य गाढ़ा स्राव टपकने के बाद पेशाब होता है यही क्रिया पेशाब करने के बाद भी हो सकती है। सुबह पाखाना करते समय पेशाब से दूधिया रंग का तरल बाहर निकलता है जिसमे चिकनाई नही होती है।,
चलते समय पेशाब बूंद-बूंद करके टपकता रहता है, इसी तरह बैठे रहने पर भी पेशाब बूंद-बूंद टपकता रहता है, रोगी को पेशाब के साथ लाल तलछट जम जाता है, रोगी को शाम के समय पेशाब कम मात्रा में और गाढ़ा आता है। इन लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देना बहुत ही लाभकारी रहता है।

पुरुष से सम्बंधित लक्षण- 
अपनी जवानी में ज्यादा यौन क्रियाओं में लिप्त रहने के कारण रोगी को नपुसंकता का रोग हो जाना। स्त्री के साथ संभोगक्रिया करने के बाद रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना। सोते समय रोगी का वीर्य अपने आप ही निकल जाना। मन में संभोग करने की इच्छा तेज होना लेकिन संभोग करते समय लिंग का उत्तेजित न होना, वीर्य का पतला हो जाना, अंडकोषों में पानी भर जाना तथा संभोगक्रिया सम्बंधी स्नायुदौर्बल्य आदि लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देने से बहुत लाभ मिलता है।

चर्म (त्वचा) से सम्बंधित लक्षण- 
रोगी की हथेली में सूखे, पपड़ीदार फुंसियों के उत्पन्न होने के साथ ही खुजली होना। रोगी के टखनों और चमड़ी की परत के आस-पास तथा उंगलियों के बीच में खुजली सी होना। रोगी की पलकों के, दाढ़ी के और जननेन्द्रियों के बाल झड़ने लगते हैं। उंगलियों के जोड़ों के आसपास, उंगलियों के बीच में और हथेलियों में खुजली होना। उंगलियों के बीच में फफोले से पड़ना। चेहरे पर मुहांसे निकलना। त्वचा पर काले निशान पड़ने के साथ तेल सा जम जाना आदि लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देने से लाभ मिलता है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण- 
रोगी को सुबह उठने पर पीठ के नीचे वाले भाग में लकवा मार जाने जैसा दर्द होना, रात के समय रोगी के हाथों में बहुत तेजी से होने वाला दर्द जैसे लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि का सेवन कराना बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

नींद से सम्बंधित लक्षण- 
रोगी के पूरे शरीर की खून की नलियों में कंपन होने के कारण पूरी रात सो न पाना। पेट में बहुत जलन होती है। आधी रात तक रोगी जितनी भी कोशिश कर ले सो नहीं पाता है लेकिन सुबह के समय अंधेरे में ही रोगी की आंख रोजाना एक ही समय पर खुल जाती है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देना बहुत ही लाभकारी रहता है।

मन से सम्बंधित लक्षण- 
रोगी के मन में यौन सम्बंधी विचार आने के साथ ही रोगी का वीर्य निकल जाना। रोगी जरा सा भी दिमाग का काम कर ले उसे थकान सी हो जाती है। रोगी हर समय उदास सा ही बैठा रहता है। रोगी के मन में कभी न मिटने वाली निराशा पैदा हो जाना आदि लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि देना बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

सेलेनियम के प्रभाव को समाप्त करने वाली औषधियां
इग्ने, पल्सा आदि औषधियों का उपयोग सेलेनियम औषधि के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

प्रतिकूल- चायना, मदिरा।

सेलेनियम के रोगियों में रोग वृद्धि कब होती है-
हवा के झोंके से, 
धूप में, 
गर्म दिनों में, 
कोल्ड ड्रिंक, 
चाय या शराब, 
नींद के बाद रोग बढ़ जाता है।

शमन-
ठण्डी हवा या ठण्डा पानी मुंह में लेने से रोग कम हो जाता है।

तुलना-
सेलेनियम औषधि की तुलना ऐग्नस, कैलैडि, सल्फ, टेलूरि, फास्फो-ए से की जा सकती है।

मात्रा- रोगी को सेलेनियम औषधि की 6 शक्ति से लेकर 30 शक्ति तक देने से कुछ ही समय में रोगी ठीक हो जाता है।

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