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औषध निर्माण साला की आंतरिक व्यवस्था 


निर्माण शाला में आंतरिक व्यवस्था निम्न प्रकार से होनी चाहिए:-----


(1) कच्ची औषधियों का भंडारण एक स्थान पर बंद जगह में होना चाहिए और उस कमरे को "कच्चा स्टोर" नाम से पुकारा जाना चाहिए। कमरे के अंदर कच्ची औषधियां अलग-अलग स्थानों पर कन्टेनरो में सुरक्षित होनी चाहिए । कंटेनरो के ऊपर कच्ची औषध-मूल का नाम व स्टोर करने की तारीख आदि अंकित होना चाहिए । अलमारियों में औषधियों को अल्फाबेटिकल नाम क्रम में रखा जाना चाहिए । ताकि औषधियों को ढूंढने में देर न लगे । पूरे स्टोर का एक इंचार्ज होना चाहिए जो औषधियों का स्टॉक रजिस्टर मेंटेन करता रहे ताकि स्टोर में औषधियों की कमी न होने पाए।


(2) लिक्विड आदिशक्ति , सिंगल स्पेजिरिक एसेंस,कामप्लेक्स स्पेजिरिक एसेंस , डायलूट स्पेजिरिक एसेंस , बिजलियां तथा अन्य उत्पादन जो निर्माण साला में होते हैं उनको अलग-अलग रखने की व्यवस्था उनके अल्फाबेटिकल नाम क्रम में होनी चाहिए ।


(3) तैयार औषधियों को जिस कमरे में रखा जाता है उसे "पक्का स्टोर" कहा जाता है । इसमें एक स्टोर कीपर होता है जो औषधियों के पक्का स्टोर के अंदर जाने और बाहर निकलने का हिसाब रखता है । ताकि औषधियां चोरी न हो सके ।

(4) निर्माण शाला में पूर्ण रूप से तैयार आदि द्रव वाली औषधियां ब्रोंज कलर की शीशियों व बोतलों में पैक रखना चाहिए । इस कलर की शीशियो में औषधियां खराब नहीं होती है।

(5) औषधियों के निर्माण में भेषजवह (Vehicles) प्रयोग किए जाते हैं उनका एक अलग स्टोर होना चाहिए जहां उन्हें सुरक्षित रखा जा सके । 

(6) औषध निर्माण शाला में यह प्रयोगशाला होनी चाहिए जहां पर तैयार औषधियो की एक समान्य टेस्टिंग होनी चाहिए उसके बाद उसे बोतलों में पैक करना चाहिए।

(7) औषध-निर्माण शाला के अंदर एक ऑफिस होना चाहिए जो निर्माण शाला में शासन व्यवस्था, बिक्री व्यवस्था , कर्मचारी पेमेंट व्यवस्था आदि की समस्त देखभाल करें।

(8) आय व्यय का ब्यौरा रखने हेतु एक ऑडिटर भी होना चाहिए ।

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