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प्लांट एक्सट्रैक्ट निकालने का सिद्धांत

इलेक्ट्रो होम्योपैथिक  औषधियों को बनाने के लिए सबसे से पहले प्लांट  एकत्र कर उसे छाया मे सुखा लेते है। उसके बाद उसे पानी से साफ कर लगभग 100 डिग्री तक के  गर्म किये हुए पानी में डालकर ढक  देते है और उसे ठंडा होने देते हैं ( यह क्रिया कुछ पौधों के के लिए ही की जाती है शेष ठंडे पानी में भी डाल सकते हैं ) तो हम देखते हैं कि हर्ब (प्लान्ट)  डाला हुआ पानी धीमे धीमे रंगीन होने लगता है अर्थात प्लान्ट का एक्सट्रैक्ट (क्रूड औषधि मूल) पानी में आने लगता है। अब सवाल यह उठता है कि यह एक्सट्रैक्ट पानी में क्यों आ रहा है ? और कब तक आएगा?

तो आप समझ ले यह कार्य  परासरण (Osmosis) क्रिया द्वारा होता है। अब सवाल यह उठता है कि परासरण क्रिया  क्या है ? 


परासरण

जब दो विभिन्न सांद्रता वाले विलयनों (Solutions) को अर्ध पारगम्य झिल्ली  द्वारा अलग किया जाता है तो तनु (Dillute )विलयन के अणु सांद्र (Concentrate) विलयन की ओर जाने लगते हैं और यह तब तक जाते  रहते है जब तक दोनों विलयन एक जैसे नहीं हो जाते है।  इस क्रिया को Osmosis क्रिया कहते हैं।

परासरण के इस सिद्धांत को सबसे पहले वैज्ञानिक Dutrochet ने प्रतिपादित किया था।

परासरण क्रिया मुख्यतः दो प्रकार की होती है :----

(1) Xso-Osmosis

यदि कोई सूखा पौधा जल में डाला जाता है तो जल का परासरण दाब (Osmotic pressure) पौधे के कोशिका रस /जीवद्रव्य / प्रोटोप्लाज्म के परासरण दाव से अधिक (Hypertonic) होता है तो ऐसी स्थिति मे पौधे के अंदर  पदार्थ  बाहर जल मे आने लगते है।

यह पदार्थ तब तक बाहर जल मे आते रहते हैं जब तक पौधे की कोशिकाओं के जीवद्रव्य और जल का Osmotic pressure बराबर नहीं हो जाता है ।

(2) Indo-Osmosis

इस परासरण का प्रयोग पौधे से पौध एक्सट्रैक्ट निकालने के लिए नहीं किया जाता है।

नोट:----

(1) जितना आवश्यक था उतना ही यहां वर्णन किया गया है।

(2) अधिक जानकारी के लिए पादप कार्यिकी या प्लांट फिजियोलॉजी का अध्ययन करना चाहिए।

(3) पौधों की कोशिकाओं के ऊपर एक मेंब्रेन होती है। इसी को Semiparmeable membrane कहते हैं । यह प्रत्येक Cell के ऊपर होती है । सेल के अंदर ही जीवद्रव्य या कोशिका का रस भरा होता है ।

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