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मुँहासे (ACNE)
लड़के या लड़कियों की युवावस्था में प्रवेश होते समय प्राय: चेहरे पर काले और कण्टक के समान अंकुर जैसे दानें निकलने, जिसके दबाने से पूय निर्मित डंटल निकलते हैं को युवान पीड़िका, बरें, मुँहासे, एक्ने (acne) या एक्ने वलगारिस (acne vulgaris) कहते हैं।
यह एक हट्ठी प्रवृति का रोग है जो एक बार घर लेने के बाद जब तक शरीरमें वृद्धि रूपी परिवर्तन होते रहता है, तब तक यह आसानी से छोड़ने का नाम नहीं लेता । चिकनाई उत्पन्न करने वाली ग्रंथियों में कार्य-भेद, जीर्ण अजीर्णता, कब्जियत, गरम मसाले का अधिक व्यवहार, गरिष्ट भोजन, अधिक भोजन, मासिक-धर्म की विकृति और नवयुवक या नवयुवतियों में हस्तमैथुन या कृत्रिम विधि से अपूर्ण यौवन का अति सम्भोग में लिप्त होना आदि इसके सामान्य कारण हैं !
बवासीर के रक्त का बंद होना या कभी-कभी गर्भावस्था
में भी यह हो जाया करता है । रुमाल या तौलिया से अधिकाधिक चेहरा पोंछने तथा उद्भेदों को अधिक फोडते रहने से इस रोग में अधिक वृद्धि होती है ।
प्रधानतया चेहरे की त्वचा; किन्तु कभी-कभी छाती, गर्दन और पृष्ठ की त्वचा भी इससे ग्रसित हो जाती है । बरें के अंकुर कम या अधिक संख्या या बहुत दूर-दूर भी हो सकते हैं । बरे का रोगी स्वभावतः अंकुर को नोंचते रहता है; किन्तु नोचने के बाद भी ये पुनः बनते रहते हैं । नोचने के प्रयास में कच्चे अंकुर को नोंच देने से कभी-कभी बड़ा सा घाव भी हो जाता है ।
इलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सा
S10 + A2 + L1 + S3 +GE 5th 10 बूँद आधा कप पानी मे मिलाकर पिएं!
Ver2  + S3 + A.P.P. +  C3 एलोवेरा जेल में मिलाकर लगाएं!
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  • जो इलेक्ट्रो होम्योपैथी के विकास के लिए आवश्यक होगी। सभी मित्रों से संभव सहयोग की आशा करता हूँ।
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2 comments:

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